Missing Child Helpline वर्ष 2014 से बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण, खोज एवं पुनर्मिलन के लिए समर्पित एक सामाजिक पहल है। हमारा उद्देश्य केवल लापता बच्चों को खोजकर उनके परिवारों तक पहुँचाना नहीं, बल्कि ऐसा सुरक्षित और जागरूक समाज बनाना है जहाँ प्रत्येक बच्चा भय, शोषण, मानव तस्करी और बाल श्रम से मुक्त जीवन जी सके।
जब कोई बच्चा अपने परिवार से बिछड़ जाता है, तब केवल एक बच्चा नहीं खोता, बल्कि एक परिवार की खुशियाँ, उम्मीदें और सपने भी उससे दूर हो जाते हैं। ऐसे समय में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है। इसी सोच के साथ Missing Child Helpline तकनीक, जनसहभागिता और स्वयंसेवकों के सहयोग से बच्चों की खोज और पुनर्मिलन के प्रयासों को मजबूत बनाने के लिए कार्य कर रही है।
भारत में अनेक बच्चे विभिन्न कारणों से लापता हो जाते हैं। कुछ बच्चे मानव तस्करी, बाल श्रम, शोषण अथवा अन्य अपराधों का शिकार बन जाते हैं। आज भी अनेक बच्चे दुकानों, होटलों, ढाबों, कारखानों, वर्कशॉप और अन्य स्थानों पर मजदूरी करने के लिए मजबूर हैं, जबकि उनका स्थान विद्यालय और खेल का मैदान होना चाहिए।
राष्ट्रीय नेटवर्क का निर्माण
हम एक ऐसे राष्ट्रीय नेटवर्क के निर्माण की दिशा में कार्य कर रहे हैं जहाँ किसी बच्चे की गुमशुदगी की सूचना कम समय में अधिक से अधिक लोगों तक पहुँच सके। हमारा विश्वास है कि जब किसी बच्चे को खोजने के लिए केवल उसका परिवार ही नहीं, बल्कि हजारों-लाखों जागरूक नागरिक, स्वयंसेवक और सामाजिक कार्यकर्ता सक्रिय हो जाते हैं, तो उसके सुरक्षित मिलने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
बच्चों की सुरक्षा के साथ-साथ हम उनके भविष्य को भी उतना ही महत्वपूर्ण मानते हैं। इसी उद्देश्य से "प्रारंभ – शिक्षा की नई शुरुआत" अभियान के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर एवं जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि कोई भी बच्चा केवल आर्थिक अभाव के कारण शिक्षा से वंचित न रहे।
हमारा विश्वास है कि सुरक्षित बचपन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और पारिवारिक संरक्षण हर बच्चे का अधिकार है।
Our Vision
A safe, educated and empowered childhood for every child.
Our Mission
To support child safety, family reunification, awareness against human trafficking and child labour, and create opportunities for education and a better future for every child.
जो खो गए हैं उन्हें लौटाना है,
जो रुक गए हैं उन्हें पढ़ाना है।